Online Market में बढ़ती उत्तराखण्डी मडुवे की मांग

on June 22, 2020

उत्तराखण्ड राज्य में उगाये जाने वाले मोटे अनाजों का अगर जिक्र किया जाये, तो उनमे मक्का , गेहू, भट्ट, राजमा , गहत ,धान, सोयाबीन, मडुवा, झिंगोरा, मटर ,लोभिया, चना आदि प्रमुख हैं। इन अनाजों को राज्य में बारहनाजा कहा जाता हैं। इन 12 अनाजों में से, आज हम उस अनाज की बात करेंगे । जो पोष्टिकता के साथ साथ गुणों की खान है। देश के माननीय प्रधानमंत्री अपने कार्यक्रम मन की बात के माध्यम से, उसके बने बिस्किट्स का जिक्र कर चुके है। जी हाँ दोस्तों आज हम बात करने वाले है, उत्तराखण्ड के मडुवे के विषय में। वैसे तो मडुवा देश-विदेशो में अपने गुणों एवं पौष्टिकता के लिए पहले से ही लोकप्रिय है। परन्तु जब से प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी जी की विशेष टिप्पणी ने सबका ध्यान इसकी ओर आकर्षित किया है। तब से ऑनलाइन (Online) एवं ऑफलाइन (Offline) मार्किट में आर्गेनिक (Organic) मडुवे की मांग में भारी उछाल देखने को मिला है।

Madua ragi for health

मडुवे के व्यवसाय से जुड़े लोगो से बात की जाये तो पता चलता है कि, वे इसकी मांग की पूर्ति नहीं कर पा रहे है। राज्य में इसकी आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर का निर्माण करके खेती की जा रही है। राज्य सरकार किसानो को इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित करने का कार्य कर रही है।वर्तमान में हमारे परम्परागत खाद्य पदार्थो में कीटनाशक रसायनो के बढ़ते प्रयोग तथा उनसे उत्पन्न रोगो से लोगो का उनसे मोह भांग हुआ है। जिस कारण से लोग खाने के अन्य पुराने विकल्पों की ओर देख रहे है।

मडुवा लोगो की दैनिक खाद्य जरूरतों की पूर्ति करता है। यदि हम आज से लगभग 50 साल पीछे मुड़कर देखे। उस समय मडुवे की रोटी ही गेहू के स्थान पर प्रयोग होती थी। बाद में हरित क्रांति से मडुवे की रोटी का स्थान गेंहू ने ले लिया। जिस कारण से मडुवा पहाड़ो में केवल इसकी शौक़ीन खेती तक ही सिमट कर रह गया था। वर्तमान में एक बार फिर से लोगो का ध्यान आर्गेनिक मडुवे की ओर गया है। मडुवे का वानस्पतिक नाम इल्यूसीन कोराकाना है। इसे कुमाऊँ क्षेत्र में इसे मड़ुवा, गढ़वाल क्षेत्र में कोदू तथा दक्षिण भारत में रागी के नाम से जाना जाता है।

मडुवे की खेती प्रमुख रूप से भारत तथा साउथ अफ्रीका में की जाती है। राज्य में मडुवे की लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए इसके बिस्किट्स, बर्फी, लड्डू , मोमो, ब्रेड आदि उत्पाद भी लोगो के द्वारा बनाये तथा बेचे जा रहे है। वर्तमान में राज्य से बाहर केक,सूप,डोसा,उपमा, चिप्स, चॉकलेट और आर्युवेदिक दवा आदि में भी मडुवा उपयोग किया जा रहा है।

मडुवे की खेती

  • मडुवे की बुआई जून माह के अंत में की जाती है। मडुवे को आराम से ऐसे स्थानों में लगाया जा सकता है। जो केवल बारिश के पानी पर निर्भर हो। मड़ुवा एक कम पानी वाली फसल है। कुमाऊनी में बोलते है , मड़ुवा उबराड़ी फसल है। उबराड़ी कम पानी वाली भूमि को कहते है।
  • मडुवे की फसल 90 दिनों के आस-पास तैयार हो जाती है। बुआई के बाद दो बार इसकी गुड़ाई एवं निराई की जाती है। मड़ुवा फसल के बारे में, मैं आपको एक रोचक बात बताना चाहता हूँ। जब इसकी फसल की प्रथम बार गुड़ाई की जाती है, उस समय इसमें दन्यों (दनेला) लगाया जाता है। दन्यों लगाने का उद्देश्य मडुवे की फसल की जड़ो को हिलना-डुलाना तथा उसे अधिक मात्रा में कलियाँ प्रस्फुटित करने को उत्साहित करना होता है।
  • मडुवे की फसल में गेंहू के समान कलियाँ लगती है,जब फसल तैयार हो जाती है तो इन कलियों को एकत्रित कर लिया जाता है। कलियों से मडुवे को निकल कर सुखाया जाता है। उसके बाद आवश्यकतानुसार विभिन्न उत्पादों हेतु इसकी पिसाई एवं उपयोग किया जाता है।
  • मडुवे की फसल की घास दुधारू जानवरो के लिए उत्तम मानी जाती है। इससे पशुओ के दूध में वृद्धि होती है।

 

मानव स्वास्थ्य के लिए वरदान है मड़ुवा

मडुवे की पोष्टिकता एवं मांग के बारे में हम बता ही चुके है। अब बात करते है मडुवे के स्वास्थ्य लाभ के बारे में। राज्य में कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी, टिहरी गढ़वाल तथा विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा मडुवे की विभिन्न किस्मो तथा लाभों से सम्बंधित शोध कार्य संचालित करते रहे हैं। ऐसे ही मडुवे के कुछ महत्वपूर्ण लाभों को हम आपके साथ साझा कर रहे हैं।

 



विभिन्न तत्वों तथा खनिजो की खान है मड़ुवा- मडुवे के प्रति 100 ग्राम मात्रा में प्रचुरता मे आयोडीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, ट्रिपटोफैन, आयरन, मिथियोनिन, केल्शियम, प्रोटीन, कैरोटीन, लेशिथिन तथा फास्फोरस आदि पाए जाते हैं।

कब्ज में रामबाण है मड़ुवा - Madua फाइबर से भरपूर सुपाच्य खाद्य है। इसके सेवन से पेट सम्बन्धी परेशानी गैस, कब्ज आदि से निजात मिलती है।

डायबटीज के मरीजों के लिए संजीवनी से कम नहीं है मड़ुवा - जो लोग शुगर (डायबटीज) से ग्रसित है। डॉक्टर उन्हें गेहू की रोटी के स्थान पर मड़ुवे की रोटी खाने की सलाह देते हैं क्योकि मडुवे में फाइबर,एमीनो एसिड, प्रोटीन तथा खनिज तत्व पाए जाते है। जो इसे शुगर फ्री बना देते है जिस वजह से यह शुगर रोगियों के लिए खाने योग्य बेहतर विकल्प बन जाता है। इसके बिस्किट्स और नमकीन शुगर रोगियों द्वारा अधिक मात्रा में खायी जाती है।

एनीमिया को रखे आपसे दूर - महिलाओं में महावारी के दौरान या खून में आयरन की कमी के कारण, खून में हीमोब्लोबिन की कमी हो जाती है। इस समय डॉक्टर्स के द्वारा मडुवे के सेवन की सलाह दी जाती है। मडुवे को अंकुरित रूप में दलिया या रोटी बनाकर आहार में लेना चाहिए। इससे शरीर में आयरन की कमी पूरी हो जाती है तथा शरीर में खून का निर्माण होने लगता है।

वजन घटाने में सहायक है मडुवा - मडुवा में फैट की मात्रा अन्य तत्वों जैसे फाइबर , एमिनो अम्ल की अपेक्षा कम होती है। जिससे यह एक उत्तम लो-फैट आहार है। जिम ट्रेनर के द्वारा वजन कम करने हेतु इसकी पैरवी की जाती है।

हड्डियों को मजबूत रखने में मददगार है मडुवा - जिन लोगो को ऑस्टियोपोरोसिस( हड्डियों का कमजोर होना और दर्द करना) है या जिन लोगो की उम्र 40 वर्ष से अधिक है। उन्हें अपने आहार में मडुवा अवश्य शामिल करना चाहिए क्योकि इसमें 80% तक कैल्शियम होता है। मडुवा हमारी हड्डियों को मजबूत रखता है और बढ़ती उम्र में कैल्शियम की कमी की पूर्ति करता है।

दूध की कमी से जूझ रही माताओ के लिए वरदान है मडुवा - जिन माताओ को प्रसव के बाद दूध की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन माताओ के लिए मडुवा वरदान है। क्योकि इसमें सभी विटामिन्स, फाइबर एवं अन्य पोषक तत्त्व पाए जाते है। जो शरीर में दूध की कमी को पूरा करते है। मैंने अक्सर पहाड़ी महिलाओ को कहते सुना है - जब वे प्रसव में थी, उन्हें उनकी सास द्वारा मडुवे की रोटी साग के साथ दी जाती थी। मडुवे का प्रत्यक्ष लाभ शिशु की माता को मिले, इसीलिए सास ऐसा करती रही होंगी।

मडुवे के अन्य प्रभावकारी लाभ - मडुवे में पाये जाने वाले मेथियोनीन, लाइसिन एमिनो एसिड तथा फाइबर तत्त्व हमारी चेहरे की त्वचा की सेहत का ख्याल रखती है। जिससे त्वचा में झुर्रियां नहीं पड़ती है। आयुर्वेदिक फेस -पैक में मडुवे का उपयोग होता है। तनाव से दूर रखने में भी मडुवे का सेवन लाभदायक होता है। यह हमारे ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करने में सहायक है।

चलते चलते

Covid-19 के कारण पहाड़ो में लौटे प्रवासियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर बन सकता है। वर्तमान में Online market में मडुवे की जबरदस्त मांग है। राज्य सरकार किसानो को मडुवे की खेती के किये प्रोत्साहित भी कर रही है। भारत सरकार के "Vocal For Local" और 'आत्मनिर्भर भारत' तथा राज्य सरकार के स्वरोजगार कार्यक्रम को एक साथ सिद्ध करने का मौका है। तो क्युँ न राज्य में अधिक से अधिक मडुवे की पैदावार की जाये और स्वयं, राज्य और राष्ट्र को सशक्त बनाया जाये? 

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