‘कटहल’: द्वंद आज भी है कि ये फल है या सब्जी लेकिन इसके फायदे अनेक हैं

on September 30, 2020

कटहल (Jackfruit) को सब्जी कहने में ही एक द्वन्द छुपा है, वो ये है कि कई लोग इसे सब्जी मानते हैं और कई लोग इसे फल की श्रेणी में रखते हैं, आप इसका सेवन जिस भी रूप में करें इसके फायदे अनेक हैं। अगर रहना है आपको हेल्दी तो अपनी कटहल से कर लीजिये दोस्ती। 

इस लेख के मुख्य बिंदु

  • कटहल का वानस्पतिक नाम
  • भारत में कहां-कहां पाया जाता है कटहल
  • किस मौसम में होता है कटहल
  • कटहल खाने से होते हैं ये हेल्थ बेनिफिट्स 
  • कटहल का आचार और फायदे

कटहल का वानस्पतिक नाम

आपको बता दें कि कटहल का वानस्पतिक नाम ‘आर्टोकार्पस हेटेरोफिल्लस’ है, इसके साथ ही अवगत करा दें कि कटहल का लैटिन नाम औनतिआरिस टोक्सिकारीआ (Antiaris Toxicaria) है। 

Kathal health benefits

भारत में कहां-कहां पाया जाता है कटहल

ट्रांसपोर्ट की मदद से कटहल करीब-करीब भारत के हर हिस्से में पहुंच जाता है लेकिन इसकी खेती मुख्य रूप से यूपी, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के कई राज्यों में होती है, तो आइए जानते हैं कटहल की खेती के बारे में। कटहल की खेती के लिए किसी भी प्रकार की मिट्टी को काम में लाया जा सकता है, लेकिन इसकी सबसे बढ़िया खेती गहरी दोमट और बलुई दोमट मिट्टी में होती है। अधिकतर कटहल की खेती बीज द्वारा की जाती है। कटहल के एक हे किस्म के बीज से भिन्न-भिन्न प्रकार के पौधे उगाये जाते हैं जिसमे से कुछ प्रमुख हैं खजवा, रसदार, रुद्राक्षी सिंगापुरी और गुलाबी।  

किस मौसम में होता है कटहल

अगर आपके मन में ये सवाल आया है की कटहल में फलां कब होता है, तो इसका जवाब है कि कटहल के पेड़ में फल January-February  से  जून -जुलाई तक विस्कीक होते हैं,या फिर ये कहें की बसंत ऋतु से फल पेड़ में आने लगते हैं और बरसात के मौसम के खत्म होने तक चलते हैं। जून-जुलाई में फल में फल पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं।  भारत में तो कई वेज पसंद लोग इसे पंडितों का नॉन वेज भी कहते हैं, क्योंकि इसकी सब्जी में दमदार मसालों का उपयोग किया जाता है। वैसे तो इसके पेड़ हर तरह की मिट्टी में उग जाते हैं लेकिन तब भी इनके आइडियल कंडीशन गर्म प्रदेश होते हैं, जहाँ मध्यम से ज्यादा बारिश होती हो और दोमट मिट्टी हो, इसलिए पूर्वी उत्तरप्रदेश में कटहल काफी ज्यादा पाए जाते हैं। 

 कटहल को खाने से होंगे ये हेल्थ बेनिफिट्स 

  • बॉडी के ब्लड सर्कुलेशन को सही रखता है, रेशेदार होने के कारण कटहल में आयरन काफी मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण इसके सेवन से शरीर में ब्लड का वेग सही रहता है।
  • कटहल में कैलोरी नहीं होती है इसलिए ये आपके दिल के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद है। कटहल के अंदर पोटैशियम पाया जाता है जो कि ब्लड प्रेशर को कम करता है, जिनको बीपी की समस्या है, उन्हें इसका सेवन ज़रूर करना चाहिए।
  • अगर आपको पाचन की दिक्कत है या फिर अल्सर तक है, तो भी कटहल आपके लिए बहुत फायदेमंद है, कटहल की पत्ती भी अल्सर के इलाज के लिए उपयोग में लायी जाती है।
  • कटहल के फल और पत्तियों के अलावा इसकी जड़ भी काफी ज्यादा उपयोगी होती है, बता दें कि कटहल की जड़ को ऊबाल कर उसके पानी को अस्थमा के मरीज को पिलाया जाता है, थायराइड के लिए भी कटहल का उपयोग किया जाता है, आयुर्वेद में कटहल की उपयोगिता को काफी विस्तार से समझाया गया है।
  • कटहल खाने से इम्युनिटी भी अच्छी होती है, जिससे आप वायरल इन्फेक्शन से भी बच जाते हैं।
  • कटहल में मैग्नेशियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है, इसलिए अगर आपको हड्डियों में भी कोई दिक्कत हो तो आप इसका सेवन करिए, हड्डियों के लिए भी कटहल काफी ज्यादा गुणकारी माना जाता है।
  • कटहल के छिलकों से निकलने वाला दूध भी काफी उपयोग में लिया जाता है, अगर किसी को जोड़ों में दर्द है तो वो इससे मालिश करवा सकते हैं, काफी ज्यादा आराम मिलेगा।
  • मुहं के छाले काफी कष्ट देते हैं, अगर ये दिक्कत आपको भी है तो आप कटहल की पत्तीयों को चबाना शुरू करिए, 1-2 पत्तियों को चबाने से ही आपको छाले में आराम मिल जायेगा।
  • पके हुए कटहल का उपयोग करने से आँखों की रौशनी अच्छी होती है।
  • कटहल के पेस्ट को दूध में मिलाकर उसे चेहरे में लगाने से झुर्रियां भी खत्म होती हैं, ये तो वही बात हो गयी कि एक अनार सौ बीमार, मतलब एक कटहल के इतने सारे फायदे, तो अगर आज तक आपने कटहल को इग्नोर किया है तो अब मत करियेगा।

कटहल का आचार

यहां पर हम जिक्र करते हैं कटहल के आचार का, आखिर इस आचार को बनाते कैसे हैं, आइये यहां समझते हैं। इस आचार को बनाने के लिए कच्चे और सफेद कटहल का उपयोग किया जाता है, कटहल में नमक, लाल मिर्च, पीली सरसों, हल्दी, हींग और सरसों के तेल भी डाला जाता है। इसके लिए कांच के जार का उपयोग किया जाता है, कुछ दिन में कटहल का आचार बनकर तैयार हो जाता है। उत्तराखंड में कटहल का अचार काफी पसंद किया जाता है, अगर आपने कटहल का अचार कभी नहीं खाया तो आप इसे ऑनलाइन आर्डर कर सकते हैं। बस, इस आचार को निकालते समय एक सावधानी रखनी पड़ती है कि इसे हमेशा सूखे चम्मच से ही निकालना चाहिए, इससे आचार ज्यादा लंबे समय के लिए टिकता है।

सरांश

आज के दौर में मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली हैं, लेकिन इन सब खोजों का सार प्रक्रति के पास पहले से मौजूद था, भारतीय सभ्यता का खान-पान और यहां उपयोंग में आने वाले मसाले खुद में इतने सक्षम हैं कि किसी भी रोग को मुहं तोड़ जवाब दे सकते हैं, आज हमने इस लेख में सिर्फ एक सब्जी या फल की बात की है, अब सोचिये की हमारी प्रक्रति में कितना कुछ शेष बचा हुआ है, बस ज़रूरत है तो थोड़ा बाजारवाद से हटकर एक नजर प्रक्रति की तरफ डालने की, हमें स्वाद, सेहत और सुविचार तीनों मिल जाएंगे।

इसलिए हमें हमेशा ही प्रकृतिका सम्मान करना चाहिए, पत्तें नीचे भी गिरे हों तो भी उन पर सहजता से पाँव रखना चाहिए।

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