प्रोटीन का खजाना है भट्ट की दाल, जानें और भी फायदों के बारे में

on February 07, 2020

दाल Protein से भरे होते हैं। Protein से Rich Pulses में अरहर और मूंग के साथ भट्ट की दाल का नाम भी लिया जाता है, जिसे English में Black Beans के नाम से भी जानते हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में तो यह लोगों के प्रिय व्यंजनों में से एक है। भट्ट की दाल से यहां के कई इलाकों में चुड़कानी, राजड़ा, फाणु और डुबके जैसे स्वादिष्ट व्यंजन भी तैयार किये जाते हैं। Black Beans के दरअसल Health Benefits बहुत से हैं। भट्ट दाल के फायदे इतने अधिक हैं कि इसकी वजह से लोग इन्हें खाना पसंद करते हैं। विशेषकर Protein से भरपूर Food में से यह एक है।

 

Health Benefits of Black Beans:

भट्ट की दाल में आयरन, फाइबर, जिंक और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की भरमार होती है। साथ ही इसमें विटामिन ई, विटामि ए और विटामिन के की भी मौजूदगी रहती है, जो शरीर के लिए बड़े लाभदायक होते हैं। यहां हम आपको भट्ट दाल के फायदों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

 

घटता है हृदय रोग का खतरा

जब हम भोजन करते हैं तो हमारे शरीर में शुगर के बढ़ने की वजह से इन्फ्लेमेशन के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस जैसी परेशानियां होने लगती हैं। यही हृदय रोग की भी वजह बन जाते हैं। भट्ट की दाल एंटीऑक्सीडेंट गुणों से परिपूर्ण होते हैं। साथ ही इसमें फाइबर की भी प्रचुरता होती है। ऐसे में इसका सेवन करने से हृदय से जुड़ी बीमारियां दूर ही रहती हैं।

 

नियंत्रण में रहता है वजन

फाइबर की प्रचुरता भट्ट दाल में होने की वजह से इसे खाने पर पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और ज्यादा भूख इससे नहीं लगती। ऐसे में लोग कम खाते हैं और उनका वजन इस तरह से नियंत्रित रहता है।

 

नियंत्रण में रहता है कोलेस्ट्रोल

भट्ट की दाल खाने का एक और फायदा यह भी है कि इसके अंदरुनी हिस्से में जो कोलेस्ट्रोल को घटाने वाले कंपाउंड हाइपोकोलेस्टेरोलेमिक कंपाउंड होते हैं, उनकी वजह से शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्तर नियंत्रित रहता है। इस पर वर्तमान में और भी शोध चल रहे हैं।

 

ब्लड शुगर का स्तर रहता है कंट्रोल में

इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की वजह से रक्त में शुगर का स्तर बढ़ता है। एंटीऑक्सीडेंट गुण के साथ भट्ट की दाल में मौजूद डाइटरी फाइबर और प्रोटीन इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव पर करारा प्रहार करते हैं और इन्हें कम रखकर ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल में रखने में मदद करते हैं। खाद्य पदार्थों में पाये जाने वाले कार्बोहाइड्रेट्स शरीर में शुगर को कितना बढ़ा रहे हैं, इसकी माप ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index) से की जाती है। भट्ट की दाल खाने से यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी घटता है। इससे भी ब्लड शुगर नियंत्रण में रहता है।

 

महिलाओं को पहुंचाता है लाभ 

फोलेट की आवश्यकता शरीर में महिलाओं को गर्भवती के दौरान बहुत पड़ती है, क्योंकि यदि इसकी कमी हो जाए तो फिर जन्म लेने वाला बच्चा कई तरह के विकार के साथ पैदा हो सकता है। भट्ट की दाल में यह फोलेट पाया जाता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को Doctors की ओर से भट्ट की दाल को अपने आहार में शामिल करने की सलाह दी जाती है, ताकि मां के साथ शिशु को भी इसका लाभ मिल सके। हालांकि, इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि गर्भवती महिलाओं को एक दिन में 0.4 से 4 एमजी तक ही फोलेट की आवश्यकता शरीर में होती है। इसलिए इसका सेवन डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक ही किया जाना चाहिए।

 

सही रहता है पाचन तंत्र

पेट की कई समस्याओं जैसे कि कब्ज, आंत से जुड़ी समस्या इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम और आंत में होने वाली जलन में भी भट्टी की दाल का सेवन राहत देता है। कई मामलों में तो भट्ट की दाल को आहार में लेन से इसमें मौजूद फाइबर हर्निया और अल्सर से भी शरीर का बचाव करते हैं।

 

कम होता है कैंसर का खतरा

कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में भट्ट की दाल बेहद मददगार होती है। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी की ओर से किये गये एक शोध में इसका खुलासा हो चुका है। हालांकि कैंसर की बीमारी को इससे ठीक नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की आवश्यकता पड़ती है, मगर कम-से-कम इसका सेवन करने से कैंसर की बीमारी से शरीर का बचाव करने में जरूर मदद मिलती है।

 

मिलता है आयरन

केवल Protein से Rich Food में ही नहीं, बल्कि आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों में भी भट्ट दाल की गिनती होती है। इसका सेवन करने से एनीमिया यानी कि खून की कमी की बीमारी दूर ही रहती है। इसमें आयरन की शरीर में कमी होने से हीमोग्लोबिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता। वास्तव में यह एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जिसकी भूमिका शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को बनाये रखने में होती है।

 

त्वचा को पोषण देने के साथ दाद का भी इलाज

भट्टी दाल में मौजूद विटामिन ए, सिलेनियम, जिंक और विटामिन ई जैसे पोषक तत्वों से त्वचा की हानिकारक अल्ट्रा वैलेट किरणों से रक्षा होती है और झाइयां पड़ने के साथ स्किन कैंसर एवं डर्मेटाइटिस जैसी बीमारियों से त्वचा का बचाव हो जाता है। अपने एंटीफंगल गुणों के कारण भट्ट की दाल से दाद यानी कि रिंगवर्म का भी इलाज होता है, जो कि एक तरह का फंगल संक्रमण है।

 

बालों का झड़ना रोकता है और बालों को बढ़ाता है

ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स की वजह से पर्याप्त पोषक तत्व न मिलने से बाल झड़ने की समस्या होती है। ऐसे में भट्ट की दाल का सेवन करने से फोलेट, आयरन, जिंक, सिलेनियम व कई प्रकार के विटामिन मिलने से यह समस्या कम हो जाती है। भट्ट के दाल की गिनती Protein से Rich Pulses में होती है। ऐसे में यह बालों को पोषण प्रदान करके इनके बढ़ने में और इन्हें मजबूती प्रदान करने में सहायक होता है।

 

निष्कर्ष

Protein से Rich Pulses में भट्ट की दाल का स्थान बहुत ही अहम है और बच्चों के साथ किशोरों और गर्भवती महिलाओं तक के लिए यह बहुत ही फायदेमंद है। इसलिए आहार में इसे शामिल करना चाहिए।

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