किडनी की पथरी के लिए रामबाण से कम नहीं उत्तराखंड की गहत दाल

on February 07, 2020

Health Benefits of Uttarakhand's Gahat Dal

आधुनिक जीवनशैली के कारण किडनी में पथरी होना एक आम समस्या बन गई है। विशेषकर खानपान में मिलावट के कारण बड़ी संख्या में लोग किडनी में पथरी की समस्या से जूझ रहे हैं। गहत की दाल को किडनी की पथरी का रामबाण इलाज माना जाता है। यह न केवल बेहद स्वादिष्ट होती है, बल्कि शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ पथरी के घरेलू इलाज में इस्तेमाल में आती है और कई अन्य तरह की बीमारियों की रोकथाम में भी प्रभावकारी होती है। उत्तराखंड की गहत दाल के फायदे के बारे में इस लेख में हम आपको विस्तार से समझा रहे हैं। 

 

क्या है गहत की दाल? 

अपनी खास तासीर की वजह से गहत की दाल पहाड़ की दालों में विशेष रूप से पहचानी जाती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में डौली कॉस बाईफ्लोरस के नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड में तो बहुत बड़े पैमाने पर 12,319 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पथरी का घरेलू इलाज करने वाली इस दाल की खेती होती है। गहत की दाल की दो किस्में यहां उगाई जाती हैं। इनमें से एक काली और दूसरी भूरी के नाम से जानी जाती है। वैसे, पीएल-1 नामक इस दाल की एक और किस्म हाल ही में विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से भी विकसित की गई है। गहत की दाल को लेकर अब भी शोध चल रहे हैं। कुमाऊंनी में इस दाल को जहां गहत के नाम से जानते हैं, वहीं हिंदी मे इसे कुल्थी के नाम से भी जानते हैं। इसकी तासीर गर्म होने की वजह से सर्दी के मौसम में यानी कि नवंबर से फरवरी तक अधिकांशतः लोग इसका सेवन करते नजर आते हैं। स्वाद की वजह से भी लोग इसे खाना पसंद करते हैं।

 

 विस्फोटक बनाने में होता था इस्तेमाल 

गहत की दाल, जो किडनी की पथरी का रामबाण इलाज मानी जाती है, क्या उसके बारे में आप यह कल्पना कर सकते हैं कि विस्फोटक के तौर पर भी कभी इसका इस्तेमाल हो रहा था? सुनने में यह बात थोड़ी अजीब जरूर लगती है, लेकिन यही सच है। जो दाल का पानी पथरी का इलाज कर देता है, उसकी तासीर का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। तभी तो एक वक्त में विस्फोटक तैयार करने से लेकर ब्लास्ट करने तक में गहत की दाल को इस्तेमाल में लाया जाता था। ठीक वैसे ही गहत की दाल विस्फोटक के रूप में प्रयोग में लाई जाती थी, जैसे कि आज चट्टानों को तोड़ने के लिए इस्तेमाल में डाइनामाइट लाई जाती है। 

इस बारे में डॉ. वीडीएस नेगी, जो कि अल्मोड़ा के एसएसजे परिसर में इतिहास विभाग प्रवक्ता हैं, उन्हें मीडिया में एक बार यह बताते हुए पढ़ा भी गया था कि 19वीं शताब्दी तक भी निर्माण कार्य के लिए चट्टानों को तोड़ने के लिए गहत दाल इस्तेमाल में आ रही थी। यह प्रयोग प्राचीनकाल से चला आ रहा था। बड़े-बड़े चट्टानों में ओखलीनुमा छेद इसके लिए सबसे पहले बनाये जाते थे और उन्हें गर्म किया जाता था। इसके बाद गहत का खौलता हुआ पानी इस छेद में डाल दिया जाता था, जिससे कि चट्टान बिखर कर टुकड़े-टुकड़े हो जाते थे। इस तरह से गहत की दाल की महत्ता का अंदाजा लोगों को प्राचीनकाल से ही रहा है। 

 

उत्तराखंड की गहत दाल के फायदे 

अपनी गर्म तासीर की वजह से पत्थरों को दरका देने वाली गहत की दाल औषधीय गुणों से भरी हुई है। इससे मिलने वाले लाभ निम्नवत् हैं: 

  • गहत की दाल में वैज्ञानिकों के अनुसार एन्टीहायपर ग्लायसेमिक गुण होते हैं। इंसुलिन के प्रतिरोध को भी यह बड़े ही प्रभावी तरीके से कम करता है। यही नहीं, इसके बीज के छिलकों में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मिलते हैं।
  • इंडियन जरनल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित एक शोध के अनुसार किडनी में पथरी को गलाने वाले गुणों से युक्त होती है। आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली में चिकित्सक मूत्रल, अश्मरी और अमेनोरिया बनाने में इसका इस्तेमाल करते हैं।
  • गहत की दाल वजन को नियंत्रित करने में मददगार होती है।
  • गहत की दाल में प्रोटीन की प्रचुरता होती है। यह ताकत देती है। शारीरिक रूप से कमजोर लोगों और बीमारी से ठीक हुए मरीजों को इसका सेवन करने से खोई ताकत वापस मिल जाती है।
  • चावल के साथ रोटी के साथ भी गहत की दाल खाई जाती है। यह पाचन तंत्र को एकदम दुरुस्त बनाये रखती है। पाचन सही हो तो शरीर से बीमारियां दूर ही रहती हैं।

उत्तराखंड की गहत की दाल के फायदे में इसका सबसे बड़ा फायदा किडनी यानी कि गुर्दे को लेकर है। यदि किडनी में पत्थर हो गया है तो गहत की दाल का रस इसमें बहुत ही लाभकारी होता है। कई माह तक यदि गहत की दाल का रस पीते रहें तो यह किडनी में मौजूद स्टोन को धीरे-धीरे गला डालता है। गला हुआ स्टोन मूत्र मार्ग से बाहर निकलता रहता है और एक दिन पूरी तरह से गलकर किडनी से बाहर निकल आता है। इसके लिए धैर्य की जरूरत होती है और बिना रोके कई महीनों तक तब तक गहत की दाल का सेवन करना पड़ता है, जब तक कि यह पता न चल जाए कि पथरी पूरी तरह से समाप्त हो गई है। 

 

निष्कर्ष 

इस लेख में आपने उत्तराखंड की गहत दाल के फायदे के बारे में पढ़ा। गहत की दाल निश्चित तौर पर कुदरत का बड़ा ही अनमोल तोहफा है, जो किडनी की पथरी जैसी बीमारी के लिए रामबाण इलाज मुहैया कराती है। सर्दी के मौसम में इसका नियमित सेवन फायदेमंद होगा।

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